कोरोना का कहर: जानवरों से भी बदतर हालत हुई मजदूरों की

 

विदिशा। ये जो चित्र आप देख रहे हैं वे, किसी महानगर के नही हैं, वरन अपने विदिशा के ही NH सागर- ग्यारसपुर मार्ग के हैं।

लग ऐसा रहा है कि, मानोरा का मेला चल रहा हो,

वर्ष  में एक बार भरने वाला विशाल जगन्नाथ जी का मेला ,विदिशा के मानोरा ग्राम में भरता है, मान्यता है कि स्वयं जगन्नाथ स्वामी बन्धु बांधवों सहित, पुरी को छोड़ कर ग्राम मानोरा पधारते हैं,उनके दर्शनों के लिये न केवल जिले भर से ,अपितु प्रदेश भर से यात्री आते हैं। पूरी सड़कें ,आदमी ही आदमी से ठठा ठस रहा करती हैं।

वैसा ही दृश्य आजकल इस रोड पर देखा जा रहा है।

कोरोना की भयावहता से पीड़ित ,आम आदमी ,कैसे भी,जैसे बने, जिस भी साधन से बने, बस अपने घर की ओर चल पड़ा है।

आप दृश्य देख रहे होंगे, जानवरों से भी बदतर हालत में लोग, ट्रको में, आटो में ,कार में ,जैसे तैसे चल पड़ा है।

 

फिल्मों और टी वी सीरियल में भारत पाक विभाजन के समय के दृश्य ,इन  दृश्य को देखकर ताजा हो गए।

आदमी औरत खुद के भी वजन से ज्यादा का बोझ सिर पर रखकर, साथ में एकाध बच्चे को भी गोद में लिये चले जा रहे हैं।

मौत और रोग की भयावहता से पीड़ित, लोग यह सोच कर चल दिये कि,जब मरना ही है तो अपने घर द्वार पर जाकर ही मरें। कंधा देने वालों की कमु न रहेगी।और यदि बच भी गए तो भले रोजगार न मिले, अपने गाँव मे भूखे कोई नहीं रहेगा।

यहाँ, जिला प्रशासन एवं समाजसेवी साथियों के योगदान की चर्चा करना ,जरूरी समझता हूं, इन सबके कारण ,कोई भी व्यक्ति भूखा प्यासा नही रह पा रहा है। सांची रोड से लेकर मिर्जापुर चौराहे तक और उसके भी आगे कुआखेड़ी चौराहे, तक लगातार विनम्रता पूर्वक भोजन कराया  जा रहा है, चाय पानी की भी  व्यवस्था है।

मानवसेवा का यह अनोखा दृश्य है जो पूरे NH पर देखा जा सकता है। आगे ग्यारसपुर, कालापाठ, फिर बागरोद चौराहा सभी जगह लोग अपनी सामर्थ भर लगे हुए हैं जनसेवा में।

गोविंद देवलिया, वरिष्ठ समाजसेवी एवं इतिहासकार